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Sarita Tiwari Pareek(Category : Poem) (Galaxy | Readers Choice Award)

 कविता …..मजदूर
वो आता घर थका हारा
जो भी मिलता रूखा सूखा
ठंडा बासी
खुशी से वो खाता अपने
परिवार संग और सोता
सुकून की नींद
उस रूखी रोटी में
घी की महक न थी
पर पसीने की सुगंध थी
अब मिलती हैं उसे
घर बैठे
कहीं से भी रोज
ताजा बनी
सब्जी रोटी
पर उसमे उसको वो
 सुकून नहीं
जो था तेज धूप
में बैठकर खाना
और वापस
गैंची फावड़ा उठाना
अब उसे आती हैं उसमें
अपनी मजबूरी की दुर्गन्ध
…..*****…
सरिता तिवाड़ी (पारीक)

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