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विनीता सावजी।(विधा : कविता) (साथी हाथ बढ़ाना | प्रशंसा पत्र)

कट जायेगा सफर साथी निभाना साथ
मिल नहीं सकते तो क्या फोन पर कर ले बात

हम सब मिलकर करेंगे मुकाबला
चाहे जो आ जाये बला

युद्ध तो हमने कईं देखें है मोर्चे पर लडते हुये
पर इस युद्ध को जितेगे हम घर पर रहते हुए

सोचो कि भगवान ले रहा है हमारी परीक्षा
इसमें भी हमे मिल रही हैं सफाई की शिक्षा

निकालो अपने दिल से ये डर
सलामत रहेंगे जब तक हैं हमारे घर

इस काली रात के बाद आयेगी प्रभात
साथियों बस देते रहना एक दूजे का साथ

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