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शुचि शुक्ला (धन्यवाद 2019 | सहभागिता प्रमाण पत्र )

आगमन प्रस्थान तो प्रकृति का नियम है नॽ
सो तुम आए हो तो जाओगे भी अवश्य ।
यही भाव बहुत तटस्थता से समझा मैंने
जीवन के सार को अन्तर्निहित कर लिया मैंने ।
प्रिय २०१९ जब तुम आए तो हर्षित थी मैं
और अब जो चल पड़े हो तो भी हर्षित हूँ मैं ।
धन्यवाद तुम्हारा उन सभी पलों के लिए
जब प्रेम के अस्तित्व को भरपूर जिया मैंने ।
धन्यवाद तुम्हारी उन सभी नसीहतों के लिए
जब जीवन फूलों की सेज नहीं जाना मैंने ।
धन्यवाद कि तुमने सिखाया विश्वास रखो
स्वयं पर ताकि तुम्हारी शमा सदा रौशन रहे ।
भरोसा रखो इंसान और उसकी इंसानियत पर
कि इस कोलाहल में भी शान्ति स्थापित रहे ।
धन्यवाद कि तुमने सिखाया हम बुरे नहीं
मात्र दिग्भ्रमित हैं अन्धकार से ग्रसित हैं ।
धन्यवाद कि तमसो मा ज्योतिर्गमय सिखाया तुमने
हर अन्धकार का एक सूरज होता है समझाया तुमने ।
धन्यवाद कि तुम्हारे गमन पर दुखी नहीं जागृत हैं हम
कि एक वर्ष खोया नहीं अनुभवों को पाया है हमने ।
धन्यवाद कि उमीद कि एक किरण दिखाते हो तुम
सर्द समाज को भावनाओं की आंच से जीवित रखें हम।
धन्यवाद २०१९ कि तुम जाते हो अनवरत की ओर
एक नये सृजन के बीजारोपण का संदेश देकर ।

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