कुछ छोड़ आया हूं, अंधेरो मै,
बीती रातों और सवेरो मै
उन तपती दोपहरों मै
खाली रह बसेरों मै
कुछ छोड़ आया हूं अंधेरो मै
गुमनाम से चेहरों मै
सुनने वाले बहरों मै
चलते फिरते फेरो मै
जो अपने नहीं, उन गैरो मै
कुछ छोड़ आया हूं अंधेरो मै
लालच के उन ढेरों मै
यार थे जो गहरो मै
सागर की उन लहरों मै
उन सुनसान शहरों मै
कुछ छोड़ आया हूं अंधेरो मै
कुछ छोड़ आया हूं अंधेरो मै
One Comment on “योगेश व्यास (अँधेरा प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र )”
Thank You Ubi Team