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हेमलता मिश्र मानवी (UBI सावन की पुकार प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र)

सावन की आवन सखी सबको दी सौगात! 

बनके सपना जी उठा, सावन सबके साथ!! 

 

अब और सूना ना रहे, वो पनघट वो घाट! 

पनिहारिन पानी भरें, छन-छन गूँजे  बाट !! 

 

ऐ बदरी इतना बरस, बढ जाएं जग के ठाठ।

कर देना मेरे आंगना अपना रीता माठ।। 

 

सावनी राखी आ रही , बहन भाई का साथ

अबके सूना ना रहे, किसी भाई का हाथ ।।।

 

री बदरी बाबुल घरे, लिये संदेसा जा!

हिय में पिय सावन बसे ठूंठ डार हरियात।।

 

 

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