Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Post Type Selectors

प्रमोद सक्सेना। (विधा : कविता) (जीवन – आनंद | सम्मान पत्र)

जीवन में आनंद एक सुखद अनूभूति देता है।

किसी के होने का अहसास हमारी जिंदगी को  अनमोल बनाता है

वैवाहिक गठबंधन भी जीवन में सुखद अनुभव देता है

दो अंजान वयक्ति सदैव के लिऐ एक हो जाते है।

साथ जीने और मरने की कसमें खाते है

लेकिन हकीकत में ऐसा कब होता है

अभी तेईस सितंबर को आपनी जीवन संगनि को खोया है

तेतालीस बर्ष का अटूट बंधन था हमारा

महामारी ऐसी लगी कि वह बारह घंटे भी नहीं जी पाई

हम सुहागिन को उचित बिदाई भी नहीं दे सके

एक लावारिस अंजान वयक्ति की तरह शमशान ले गए उसे

हमारी पत्नि को हमारे बिना ही अंतिम विदाई दे दी गई

अब जीवन एकाकी सा हो गया है

आँसू तो जैसे सूख से गए है

वो कहते है न मर्द को दर्द नहीं होता

अब जिंदगी में आनंद पत्नि की यादें के सहारे

ऐ ! मौत तू कितनी निर्मम है बिना बताए हमारी जिंदगी का आनंद छीन लेती है कल ही तो उसका जन्मदिवस था।

 

प्रमोद ‘प्रकाश’।

(प्रमोद सक्सेना)

 

Leave a Comment