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दिेनेश चंद्रा। (विधा : कविता) (सावन के झूले | सम्मान पत्र)

“सावन के झूले” ——————— पड़ी हमारे पहले सावन की, आज पहली फुहार। बदरा गरजे बिजुरिया चमके, आँखे करे सजन का इन्तजार ।। अबकी बरस, ननदी

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