
रजनी सरदाना। (विधा : उद्धरण) (भाषा | प्रशंसा पत्र)
भाषा भाव अभिवयक्ति हर जन की शक्ति मुख से बोलो तो मौखिक लिखने से हो जाती लिखित मैं ना बोलता, ना सुनता हूँ पर अपनी

भाषा भाव अभिवयक्ति हर जन की शक्ति मुख से बोलो तो मौखिक लिखने से हो जाती लिखित मैं ना बोलता, ना सुनता हूँ पर अपनी

भाषा सिर्फ हमारे विचारों को प्रगट करने का माध्यम नहीं है बल्कि ये हमारे चरित्र और शिष्टाचार को भी दर्शाती है रजिंदर कौर ( रेशू

उम्र के आखिरी पड़ाव पर आज जब कभी छत पर बैठता हूँ तब चाँद में उसके चेहरे का ही दीदार होता है।बादलो में चाँद छुपता

भाषा वाणी का श्रृंगार है, अभिव्यक्ति का भंडार है, व्यक्तित्व का पैना हथियार है, इंसान की सही पहचान है, भाषा न हो तो आदमी लाचार

तोतली,चंचल, रंगोली इक उम्र जो नाज़ुक भोली बस करती हँसी ठिठोली बच्चाें की मीठी बोली प्रीत का पहला सावन वो प्रेम पत्र मनभावन अनजान भावना

उमड़ते हुए बस जज़्बात है ये जब कहनी हो किसी से मन की बात हो कोई भी बोली या कोई ज़ुबान हर किसी के नसीब

भाषा ही तो है कभी लगे शहद कभी नीम सी अनीता वाधवानी

प्यार की कोई भाषा नहीं होती , खामोशी भी अक्सर काफ़ी है दिल में छुपे जज़्बात समझने के लिए। निशा टंडन
साम्प्रदायिकता का दुष्परिणाम भाषाओं को भी भुगतना पड़ा ..……… लोग हिन्दी को “हिन्दू” उर्दू को “मुसलमान”समझने लगे ! ✍🏼मनीषा तिवारी

कैसे बताऊँ , कितनी प्यारी हो तुम , मुझे मेरे माँ बाबा से,और उनको उनके से मिली हो तुम , कहना सुनना,सीखना सीखना ,सब तुमसे
UBI stands for United By Ink®️. UBI is a Global Platform- the real-time social media interactive forum created for Readers, Writers and Facilitators alike.This platform aims to help creative souls realize their writing goals.