
निशा टंडन। (विधा : कविता) (धोखा | सम्मान पत्र)
तेरे हर वादे पे किया यक़ीन इस क़दर हमने कि सारी दुनिया को ही भुला बैठे हम जो थे अपने वो एक एक कर बेगाने

तेरे हर वादे पे किया यक़ीन इस क़दर हमने कि सारी दुनिया को ही भुला बैठे हम जो थे अपने वो एक एक कर बेगाने

फेसबुक पर अंगुलियां चलाते चलाते फ्रेंड रिक्वेस्ट पर क्लिक किया तो देखा बहुत सारी फ्रेंड रिक्वेस्ट आई हुई है। उनमें से एक नाम जाना पहचाना

धोखा खाकर ही जिन्दगी समझ आई।वर्ना मेरे लिए तो सब अपने ही थे। वैशाली तांबे

धोका करना और धोका सहना दोनो ही गलत है , क्यूँकि धोका करने वाला और सहने वाला दोनो ही अंत में , अपनी मन की

.*तेरी इंसानियत का हश्र* तेरी रूह को नेस्तनाबूत कर के कई बार खंजर घोपे जाएंगे। दुश्मनों से क्या खौफ तुझे ये तेरे अपने है

कलियुग में जो दिखता है, बड़े लाभ का मौका। देख भाल कर डग रखना , वहीं छुपा है धोखा । फितरत ये इन्सानी है, हरदम
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