
भावना शर्मा । (विधा : लघु कथा) (धोखा | प्रशंसा पत्र)
‘मां फीस के रुपये दे दो’ मेघा ने कहा तो रीमा ने कहा ,दराज में से ले ले। रीमा ने पति की अकाल मृत्यु के

‘मां फीस के रुपये दे दो’ मेघा ने कहा तो रीमा ने कहा ,दराज में से ले ले। रीमा ने पति की अकाल मृत्यु के

राम लाल एक छोटे से गांव में अपने परिवार के संग रहते थे।उनके परिवार में उनकी पत्नी पार्वतीबहन,सत्रह साल की उनकी बेटी और एक उनका

क्या अजब ये हादसा है, इस जहाँ को क्या हुआ है, दौर कैसा आ गया है, चल पड़ी कैसी हवा है ! आदमी ही आदमी

धोखा केवल एक शब्द नहीं है, यह एक कलंक है।क्योंकि धोखा नियति नहीं है धोखा चयन है।यह इन्टरनेट और सोशल मीडिया का जमाना है, सोशल

मुफ़लिसी के इस दौर में रोटी भी क़ीमती होती है, यहाँ तो बस धोखे ही मुफ्त में मिलते है साहेब।। ©डॉ. श्वेता प्रकाश कुकरेजा

पूजा तवे पर परांठे सेक रही थी..सबको नाश्ता खिला रही थी।सुबह से उसकी भागदौड़ शुरू हो जाती थी। तभी उसकी सासुमाँ , विमलाबेन रसोईघर में

नि:संदेह ही , वो मुझे धोखा देकर ,बहुत संतुष्ट हुआ होगा पर आत्मग्लानि की तपस ने , उसे कभी तो छुआ होगा देख तो लिया
Book Title: Conquering Corporate Circus: Be a lion not a mouse: Be a butterfly not an ant. Author: Pradeep Chhabra Format: Kindle My

योग एक ऐसी क्रिया है, जो न सिर्फ मनुष्य को शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थ रखने में उसकी मद्द करती है, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान
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