
संदीप कुमार।(विधा :कविता) (मानवता | प्रशंसा पत्र)
इस दौर – ए – मुफलिसी में मानवता कौन निभाता है? कैफियत बनी शोहरत जो हर इंसान इसमें खुद ही टूट जाता है। जमा किया

इस दौर – ए – मुफलिसी में मानवता कौन निभाता है? कैफियत बनी शोहरत जो हर इंसान इसमें खुद ही टूट जाता है। जमा किया

मानुष जीवन नहीं मिलता है हमको बारम्बार सच्चा मानव बन कर क्यों न दें हम प्रभु का ऋण उतार बड़ा ही सरल है मानव धर्म

नमस्कार दोस्तों , आपने भी महसूस तो किया ही होगा कि अक्सर चर्चा का विषय बनता है ये शब्द ‘ मानवता ‘ पर व्यवहार में

मानवता नैसर्गिकी नियम ही सब पर भारी सदा कहाते हैं जीवन के रथ के दो पहिए नर और नारी कहाते हैं फिर भी क्यों कुछ

~ : मनुज योनि : ~ मनुज योनि श्रेयस्कर है..कहा मुनियों ने संतों ने बड़े पुण्यों का ये फल है..कहा सब धर्मग्रंथों ने इसे तुम

‘वह रोज़ मुझे बस स्टॉप पर दिखती…. पीहू को देख मुस्कुराती….पर मुझे यह न भाता… ज़माना बड़ा खराब है…बचपन की सुनी यह बात बैठ गई

हमारा जीवन तभी सार्थक होगा जब समूचे विश्व में मानवता ही एकमात्र धर्म होगा @ रीता बधवार (मौलिक) (सर्वाधिकार सुरक्षित) 5.3.2020.

जरूरी नहीं तुम बनो कोई पुरषोत्तम या सीता बनो साधारण मानव रखकर थोड़ी सी मानवता

गले मिल ले इन्सानियत गढे बँधे प्यार से ।
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