भावों और
मुखर मौन का
आओ एक ऐसा
सेतु बनाए
जो मेरे मन से
हो कर गुज़रे
और तेरे मन की
देहरी तक जाए
जब तुम रुक जाओ
कुछ कहते कहते
तो मौन तुम्हारा
मैं पढ़ पाऊं
और जब मैं बोलूं
कुछ आंखों से
वो सीधे तेरे
दिल तक जाए
मैं तुमको समझूं
पूरा का पूरा
तू मेरे मन का
दर्पण बन जाए
भावों और
मुखर मौन का
आओ एक ऐसा
सेतु बनाए
©️इरा श्रीवास्तव