फूलों को खिला देख,
खिल जाता है मन मेरा भी।
कहते है बच्चे फूल जैसे कोमल होते हैं,
पर फिर भी ये फूल अवसाद बनके चौरह पर निकलते हैं।
जब सुबह कि पहली किरण खिलती है ,
तब ना जाने कितने फूल आज भी मुरझाए घूमते हैं,
आओ पहल करे और इन फूलों को गुलदस्ते में जोड़े।
खिली कलियों से गुलशन महके, चहके खुशबू बनकर
फैले चारो ओर ये सब इंद्रधनुष बनकर ,
शिक्षा का उपवन सजाकर आओ खिला दे,
गुलशन बच्चों में मुस्कान बनकर ।
नन्हे नन्हे कोपल मन से बच्चे बोले
फूल खिले हैं गुलशन गुलशन।
(स्वरचित सीमा वालिया)