डॉक्टर जीवन बचाने की शपथ के साथ जीवन संग्राम में उतरते हैं । डॉ श्लोक
कर्मठ सफल सर्जन थे ।२४घण्टे वे मरीजों को जीवनदान देने में जुटे रहते
इमरजेंसी में तत्परता से पहुंच जाते थे । शालिनी इस पर अक्सर झुंझलाती देर होने पर या रात को इमरजेंसी काल पर चिढ़ जाती थी मानो हमें आराम की जरूरत ही न हो ।
एक दिन डाक्टर तीन आपरेशन करके घर लौटे,भोजन के तुरंत बाद सोने चले गए । शालिनी ने सोचा आज कोई इमरजेंसी काल रात में आया तो डॉक्टर को नहीं उठाएगी उसने मोबाइल बंद कर दिया।आधी रात को लैंडलाइन
बराबर घनघनाती रही उत्तर नदारद। शालिनी सोचती कोई न कोई आन ड्यूटी डाक्टर मरीज देख लेगा।
अगली सुबह अस्पताल आकर डा श्लोक को मालूम हुआ कल रात एक नौजवान का एक्सीडेंट हुआ था तुंरत इलाज के अभाव में अस्पताल पहुंचकर भी उसने दम तोड़ दिया । डॉ ने शव देखते ही पहचान कर पत्नी को बुलाया
देखते ही वह बेहोश हो गयी उसका छोटा भाई शिव शव में बदल चुका था।
होश आते ही उसने शपथ ली भविष्य में
पति के साथ इमरजेंसी में वो भी साथ आएगी। शालिनी का जीवन ही बदल गया अब मरीज के परिजनों को संभालने लगी।सोचती मेरा शिव इनमें
कहीं छुपा देखता है। अपनों को खोकर
ही पराया दर्द अपना हो जाता है ।।