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विधा–कविता,#शीषर्क–“”वीरों का नमन

## शीर्षक—-वीरो का नमन
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दिल की आवाज बस यही हो
हर वंदना में मातृभूमि का गुणगान हो
नीजता के संकरे-संकीर्ण दायरे में
ना बिसरे महापुरुषों-योद्धाओं के नाम
कभीं ना हो कम अपनी कृतज्ञता
शहीदों के अप्रितम त्याग-बलिदान का

नमन शहीदों का ना महज हो औपचारिकता
जन्मदिवस शहीदो का राष्ट्रीय-पर्व घोषित हो
वीर भगत सिंह, सुखदेव,राजगुरु का
देशभक्त जाबांजों में अग्रणी उपाधि हो…

हर बच्चे के हृदय में देशप्रेम का विशिष्ट मान हो
मातृभूमि के लिए निछावर होने का गौरव गान हो
वीरों की समाधी बने श्रेष्ठ सैरगाह
हर युवा का अर्पित श्रद्धा-सुमन हो

असली नायक और अभिनेता के वास्तविक फर्क का
जन-जन के अंर्तदृष्टि में शीशे-सा साफ ज्ञान हो
देश-भक्ति ,राष्ट्र-धर्म न रहे सिर्फ कागजी ख्याल
बच्चों के पठन-पाठन का मात्र रस्मों-रिवाज
अपनी हर सोच,हर कदम देश-हित में अग्रसर हो..
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#स्वरचित और मौलिक
@अर्चना श्रीवास्तव, मलेशिया

(2)

##युवा संचेतना
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कितनी भी दुश्वारियां आये हिम्मत ना हारना
चुनौतियों के आगे कभीं न मस्तक ना गाड़ना
उमंग हो तरंग हो ,जोशीले तरानों का संग हो
महफिल हो तन्हाई तुम सदा हौले से गुनगुना

मेहनत और ताकत से अपने कर्म जुटे रहकर
भ्रमित धारणाओं और अंधविश्वासों से परे हटकर
जो मिला,जैसा भी हो विश्लेषक की भूमिका में
जरा बहकना मगर, अपनी सीमा-मर्यादा में रहकर

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# पूर्णत:स्वरचित और मौलिक
@अर्चना श्रीवास्तव, मलेशिया

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