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रजिन्दर कोर। (विधा : कविता) (दादी नानी की कहानियाँ | सम्मान पत्र)

दादी के साथ पढा़ई
गर्मी की छुट्टियाँ
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सेब से शुरू हो जाओ ,
बल्ला बाहर चलाओ,
गाड़ी का शीशा ज़रा बचाओ…..
डोगी को भी पास बिढाओ ,
असानी से उसको हराओ
फूलों को तुम ज़रा बचाओ
अंगूर भी तो साथ खाओ…..
मन से तुम खेल खेलाओ,
देखो कुलफी अभी न खाओ
जोकर को जैसे मुहँ न बनाओ,
तू तो अब शेर बच्चा बन जाऐगा ,
मैंगों का मौसम अब आऐगा,
नया सा फल सिर्फ आच्छा बच्चा खाऐगा
तोता तो खुब चिल्लाऐगा
तू तो अच्छा बच्चा सो जाऐगा ।
रूटीन लाईफ से क्या बौर हो जाऐगा ?
सूरज तो उपर चढ़ सब को चिढ़ऐगा,
मुझे तो चाय बनाकर पिलाऐगा,
समय यूज़ करके दिखाऐगा
सब्जी तो माँ के हाथ की खाऐगा..
शाम को तरबूज खाऐगा…..
एक्स मस ट्री में पिली बैलस लगाऐगा…
रात को जैबरा वाला नाईट सूट पहन
कर सोजाऐगा ,
तू तो सारे काम कर के खुशी से छुट्टियाँ
बिताऐगा ।
दादी के साथ ए बी सी की पूरी पढ़ाई कर डाली ।

रजिन्दर कोर ( रेशू )

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