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मुक्ता टंडन । (विधा : कविता) (तो क्या | सम्मान-पत्र)

तो क्या!!!गरआज वक्त थम सा गया है,
माना बुरा है,कल फिर अच्छा आएगा ही।
सूनी पड़ी हैं गलियां– तो क्या !!!!!
कल वहां भी गूंजेगी बच्चों की किलकारियां, गूंजने लगेंगे तराने,
तो क्या !!!!! –आज शहर बेरंग से पड़े हैं,
कल वहां भी जीनत होगी, रौनक छाएगी
मत घबड़ा रे मन,
गर अकेला आज है तू
तो क्या!!!!!——
कल फिर उनसे दीद होगी, अपनी भी ईद होगी,
फ़िजा गर खामोश है– तो क्या!!!!!!
फिर से चहचहाटें होंगी,बहार आएगी,
ये आसमां जो स्याह सा पड़ा है आज –तो क्या!!
कल फिर इंद्र धनुषी आभा से रंग जाएगा,
बहुत कुछ खोया है तूने— तो क्या !!!
बेशक कल फिर तू पाएगा—–

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