इंतज़ार रहेगा…..
‘ जंगल की एक सुबह ‘ का,
जब शांत शिथिल मन होगा,
पत्तों की सर्सारहट में,
मचल रहा सावन होगा..
चिड़ियों संग उडूंगी मै,
हरियाली चारों ओर होगी,
ताज़ी मखमली हवा में,
खुशियां… पुर्जोर होंगी..
गीत और संगीत की बेला में,
नया सा जीवन होगा,
शहर की कौतूहल से दूर,
संवर रहा तन मन होगा..
प्यार से प्यारे इस क्षण में,
शबनम सी आभा होगी,
दिल हिचकोले खाएगा,
जब ‘ मुझसी ‘ मेरी काया होगी..
इंतज़ार रहेगा
जंगल की उस सुबह का….
जब उम्मीदों की गुदगुदाहट होगी,
ख्वाबों का चरखा होगा,
और विश्वास की आहट होगी..
इंतज़ार रहेगा
‘ जंगल की एक सुबह ‘ का….
जब आसमां दीवाना होगा,
मौसम का शर्मिला स्वभाव होगा,
और कण कण परवाना होगा..।