“अपहरण ”
नन्ही एक दिन पहले ही परिवार के साथ इस बगीचे में आई थी इसलिए उसे घर का रास्ता पता था। डरती हुई वह घर की तरफ भागने लगी। तेज धड़कते हुए दिल से एक ही आवाज बार-बार आ रही थी “अब कभी अकेले घर से नहीं निकलूंगी।” घर पहुंचते ही उसकी बहन चिल्लाई-” कहां गई तेरी सोने की बालियां?” नन्ही ने उसे वह कागज की पुड़िया दिखाई। सारा घर इकट्ठा हो गया । सभी उसकी नादानी पर डांट रहे थे। पर उसकी मां की आंखों में आंसू थे। नन्ही को खुद से चिपका कर ईश्वर को धन्यवाद देकर बोली ” पस आ गई बस मेरी बेटी वा “