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निशा तातेड़ (UBI इंद्रधनुष प्रतियोगिता | प्रशंसा पत्र )

एक  अकेला पुष्प  वाटिका की,

 शोभा नहीं बन पाता है ।

बाग अगर फूलो से भरा हो,

तभी चमन कहलाता है ।

वैसे हर रंग खूबसूरत और, 

उनका अपना एक फसाना है, 

पर सातों रंग जब मिले 

तभी  इंद्रधनुष कहलाता है ।

अकेले हम अकेले तुम 

शायद कुछ न कर पाए, 

जो हम तुम मिल जाए

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