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निशा टंडन। (विधा : कविता) (परिक्षा | प्रशंसा-पत्र)

बड़ी मुश्किल से सुबह आँख खुली
परीक्षा की चिंता में मन हो उठा दुखी
जैसे ही माँ ने ज़ोर से लगाई पुकार
छोटे उस्ताद को चढ़ा एक सौ दो बुख़ार
सोचा परीक्षा की तो नहीं की तैयारी
घबराकर याद आई अब नानी प्यारी
जैसे तैसे वो जा पहुँचे स्कूल
जो था याद गए वो सब भी भूल
देखा जब पेपर पर प्रश्न
हो गई उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम
एक बार को सोचा पेपर ख़ाली दे आऊँ
दुम दबा कर मैं कहीं भाग जाऊँ
फिर सामने पापा का चेहरा आया
उस मंजर को सोच वो बहुत घबराया
इधर उधर देख बग़लें झाँकी
आँखों से फिर झर झर बरसा पानी
आँख मूँद फिर सर खुजलाया
एकाएक प्रश्नों का उत्तर सामने आया
झटपट उसने कलम उठाई
और लिख डाले प्रश्नों के हल
कान पकड़ छोटे ने कर ली तौबा
खुद को नहीं मैं अब दूँगा धोखा
मन लगा कर करूँगा पढ़ाई
परीक्षा की घड़ी जब सामने आई

Regards
Nisha

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