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जुगनू

जुगनू

कुछ मोमबत्तियां जला ली औऱ जल लिए कुछ चिराग
कुछ इकठ्ठा की रोशनी औऱ साथ चल पड़ा सितारों का सैलाब

देर रात जब नींद की आगोश में सोता है ये जहाँ
जुगनुओं की रोशनी से सजता है मेरा आसमाँ

चाँद बड़ी खूबसूरती से निकला कल रात खिड़की पर
धीरे से मुस्कुरा कर पूछा ,राज तीरगी में जगमगाने पर

मैने प्यार से उसको बुला कर उसके कानों में बुदबुदाया
सुनो ,जिसका कोई नहीं होता – होता उसका बस खुदाया

तीरगी -( darkness, gloom अँधेरा)

©प्रीति पटवर्धन🖋️

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