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कविता : विद्या शिक्षा
गुरु हो या शिक्षक
ज्ञान के अथाह सागर
उन से विद्या शिक्षा विना
जीवन असार
गुरु पिता गुरु माता
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु
गुरु देवों महेश्वर
गुरु परब्रह्म साक्षात् ईश्वर
गुरु मंत्र जप विना जगत अंधकार
गुरु विना नहीं मिलता दिव्य ज्ञान
काले गोरे, जात-पात कौन सा गोत्र
वो है भेदभाव रहित
सामूहिक शिक्षा प्रदान उनका पहला लक्ष्य
विनम्रता, वाणी में सत्यता
मिथ्या’ कई गुना आत्महत्या से बड़ा पाप
उनका पढ़ाया गया नैतिक शिक्षा का था मूलमंत्र
उनके आशीर्वाद से आज मैं भारत माता की योग्य सन्तान
सब बच्चों के माथे पर सर्बदा रहे
उनके आशीर्वाद के हाथ
आज ‘शिक्षक दिवस’ पर
दूर में रहकर भी करती हूं कोटी प्रणाम
गुरु विना ज्ञान नहीं
ज्ञान विना जीवन में दिव्य अनुभव नहीं
स्व रचित
अमीता दाश 🙏
