आभार २०१९
साल दर साल, हर पल हर बार
करती हूं मैं ईश्वर का आभार
साल २०१९ मे भी रही उसकी मेहरबानियाँ बेशुमार
मन करता हैं करू सृष्टि के हर रूप का धन्यवाद बार बार।
उस शीतल चांद का आभार जिसने मुझे हौंसले का चोला उड़ाया
जब रात का अंधेरा मुझे मेरी नाकामियां गिनाने बैठा
उन तमाम पत्तियों का आभार जिनकी हवा से दिल खुश हुआ
जब घर से दूर पहली बार खुद को अकेला महसूस किया
उस सूरज का आभार जिसकी हर एक किरण ने मेरा ढांढस बांधा
जब असफलता का बोझ मुझे गिराने ही वाला था
उन समुद्री लहरों का आभार जिन्होंने जीवन का फलसफा समझाया
जब मन ज़िंदगी की उलझनों में बुरी तरह से फंस चूका था
उन कलियों का आभार जिन्होंने आंखो को खूबसूरती से तृप्त किया
जब दुनिया नफरत की आग में लिप्त थी
उस अम्बर का आभार जिसने क्षितिज पे रहकर झुकना सिखाया
जब थोड़ी सी ऊचाई हासिल कर, अभिमान सिर चड़ने लगा
उस प्रकृति का धन्यवाद जिसने ऊंची इमारतों के बीच
ज़िंदगी की नन्ही खुशियों का झूला झुलाया
और इन सबसे ऊपर उस अदम्य भ्रम शक्ति का आभार
जिसने बनाया २०१९ का सफर यादगार।