उम्र दराज दरख़्त में नए विचारों की चमकती कोमल पत्तियाँ!
यह प्रतीक है इस सत्य का, उसका जीवन प्रगतिशील है,
वह नवीनता का रसपान कर पूर्ण रूप से अभिभूत है।
वह शाखों से झङी पत्तियों के दुख में क्रंदनरत नहीं,
वह विगत सुखद रात्रि की याद में डूब खोया नहीं,
वह कल ,आज और कल के अन्तर से भ्रमित नहीं।
वह उत्साहित हो नव दिवस का आलिंगन कर रहा है,
वह अपना भविष्य नये रूप – रंग से संवारने चला है।
तन की शिथिलता उसके सोच के दायरे से बाहर है,
उसका मन बिन थके, वक़्त के साथ दौड़ रहा है।
उसकी कोमल पत्तियाँ उसकी जीत का परिणाम है,
उम्र के इस पड़ाव में दुर्घर्ष जिजीविषा की पहचान है।
आराधना अग्रवाल