शब्द संख्या : ९७
शीर्षक : चीनी का अर्थशास्त्र
शाम की अत्यधिक मीठी चाय पर खट्टे मीठे व्यंगो से घायल गृहस्वामिनी जी ने अपने बड़े व्याख्यान के मध्य दिए अर्थशास्त्र की एक परिभाषा से हम सभी को चुप करा दिया…
उन्होने कहा, ‘अजी ये बताइए ? मुझे चीनी के डब्बे को धोना था और उसपर से आज डब्बे में चाय बनाने के बराबर ही चीनी थी। जब मैने चाय के पानी में चीनी डाली तो डब्बे में आध एक चम्मच चीनी चिपकी रह गई थी, उसे बरबाद करना मैने उचित नहीं समझा और उसे चाय में ही झाड़ दिया। अब आप ही बताएं मैने क्या गलत किया???
अश्विनी राय ‘अरुण’